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कथकली
कथकली डांस फॉर्म केरल का एक मशहूर और फलने-फूलने वाला शास्त्रीय नृत्य और यहाँ की परम्परा है। 'कथकली' का अर्थ है- 'एक कथा का नाटक' या 'एक नृत्य नाटिका'। 'कथा' का अर्थ है- 'कहानी'। इस डांस में एक्टर रामायण और महाभारत के महाग्रंथों और पुराणों से लिए गए चरित्रों का अभिनय करते हैं। अगर इसकी प्राचीन वेशभूषा, अजीबो-गरीब रूप सज्जा ओर भव्य आभूषणों को देखें तो हम पायेंगे कि कथकली भारत का एकमात्र ऐसा नृत्य है, जो अबतक परुषों के द्वारा संरक्षित है । कथकली के बारे मे यह माना जाता है कि यह 300 या 400 साल पुरानी कला नहीं हैं, इसकी वास्तविक उत्पत्ति 1500 साल पहले से है कथकली अभिनय , 'नृत्य' और 'गीता' यानि एक्टिंग, डांस एंड म्यूजिक तीन कलाओं से मिलकर बनी एक संपूर्ण कला है। जिसमें एक्टर बोलता एवं गाता नहीं है, लेकिन बेहद संवेदनशील माध्यमों जैसे- हाथ के इशारे और चेहरे की भावनाओं के सहारे अपनी भावनाओं की सुगम अभिव्यक्ति देता है। कथकली ड्रामा और डांस दोनों है। मगर ख़ास तौर पर यह नाटक है। इस डांस का सबसे अधिक प्रभावशाली भाग यह है कि इसके चरित्र कभी बोलते नहीं हैं, केवल उनके हाथों के हाव भाव की उच्च विकसित भाषा तथा चेहरे की अभिव्यक्ति होती है, जो इस ड्रामा को ऑडियंस के सामने पेश करती है

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